झलक रहा था दर्द उसके चेहरे पर मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था वो चेहरा |
खुद कमजोर हो गयी थी हमे वो जन्म देकर,
फिर भी रखती थी हमारा पूरा ख्याल वो सब कुछ भूलकर,
जाने कितनी ही रातों की नींद ख़राब की हमने उसकी रो रो कर,
पर फिर भी उसने शिकायत नहीं की ओर प्यार दिया अपना हरपल हस हस कर |
बाहो में वो अपनी हमे हरपल रखा करती थी,
रात दिन हमे वो अपने गले लगाकर इधर उधर घुमाया करती थी,
थक कर कभी वो हमारे पास लेटा करती थी,
बस अपनी प्यार भरी नज़रो से हमे लगातार देखा करती थी |
कुछ नहीं चाहती थी वो हमसे पर उसे एक लालच जरूर था,
सुन्ना चाहतीं थी वो 'माँ' शब्द मेरे मुँह से, बस इसी बात का उसे इंतज़ार था,
वक़्त जरूर लगा और एक दिन आया,
माँ माँ कहता हुआ मैं पुरे घर में भवरे की तरह मड़राया,
कोई ठिकाना नहीं रहा उसकी ख़ुशी का,
गले लगाकर हमे वो खूब रोई,
प्यार अब उसका अपनी चरम सीमा पर था,
अब तो इसका अहसास उसे हमारी तरफ से भी था |
जब खुली थी आँखे देखा था एक प्यारा सा चेहरा,
झलक रहा था दर्द उसके चेहरे पर मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था वो चेहरा |
Beautiful ❤️❤️❤️ lines
ReplyDeleteThank u :)
DeleteAwesome lines, Chirag keep going :)
ReplyDeleteThanks Dashrath :)
DeleteWaooo bhaiya...Awesome😇😇
ReplyDeleteWo Chirag! That's awesome
ReplyDeleteThank you :)
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