लगा दी होगी जी जान तूने उसे पाने में ,
वक़्त आया होगा जब बिखरकर रोया होगा तू किसी कोने में,
ओर अपनी हिम्मत, उत्साह ओर सपने दबा दिए होंगे तूने किसी बक्से में,
चल रहा होगा अकेला किसी अँधेरे रास्ते में,
सोच रहा होगा तू क्या अब सूरज उगेगा मेरे गलियारे में ?
पर भूलना मत तू क्यों चला था इस सफर में,
नहीं छुआ आसमा तो क्या पाने को बहुत कुछ है इस धरती में,
चल रही हैं साँसे जब तक झोक दे समय खुद को बनाने में,
आएगा एक दिन जब तू खुद सूरज बनकर उगेगा अपने गलियारे में,
ओर फैला देगा चारो ओर उजेला खुद के ओर दूसरो के रास्ते में |
Nishabd stubbed
ReplyDeleteThank you :)
DeleteVery good..Keep doing👍👍
ReplyDeleteGood Chirag mast hai poem
ReplyDeleteThank you :)
DeleteAwesome Bhai ...
ReplyDeleteThank you :)
DeleteVery well
ReplyDeleteWow...❤️
ReplyDeletelovely❤️
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