Sunday, May 5, 2019

Sometimes, continuous failures overtakes our self confidence but there is always something we are good at and motivates us to move forward and taste success. This poem is for people like us. I hope this encourages you and give a ray of hope to move forward.


देखे होंगे सपने तूने आसमा छूने के,

लगा दी होगी जी जान तूने उसे पाने में ,

वक़्त आया होगा जब बिखरकर रोया होगा तू किसी कोने में,

ओर अपनी हिम्मत, उत्साह ओर सपने दबा दिए होंगे तूने किसी बक्से में,

चल रहा होगा अकेला किसी अँधेरे रास्ते में,

सोच रहा होगा तू क्या अब सूरज उगेगा मेरे गलियारे में ?

पर भूलना मत तू क्यों चला था इस सफर में,

नहीं छुआ आसमा तो क्या पाने को बहुत कुछ है इस धरती में,

चल रही हैं साँसे जब तक झोक दे समय खुद को बनाने में,

आएगा एक दिन जब तू खुद सूरज बनकर उगेगा अपने गलियारे में,

ओर फैला देगा चारो ओर उजेला खुद के ओर दूसरो के रास्ते में |


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