Wednesday, December 15, 2021

ओ रे पंछी

ओ रे पंछी 

क्यों ऐसे बैठा है यहाँ

जरा यहाँ तो आ तू

क्यों डरा ओर सहमा सा रहता है

ओर किस सोच विचार में है तू।


जरा देख खुला है ये पिंजरा

कुछ चंद लम्हों के लिए

जल्दी तैयार होजा अब तू।


जाना है तुझे एक नए सफर पर

भर ले खुद मैं एक नई उमंग

ओर उठ जा अब नींद में से तू।


लगा कर पूरा जोर अपना

खोल डाल इस दरवाजे को

फैला कर अपने पंखो को

जरा चारों ओर खुले आसमान को तो देख तू | 


फिर उड़ चल मीलों मील

ना पीछे मुड़कर कभी देखना तू | 


बढ़ चल अपनी मंजिल की ओर

ओ रे पंछी

चल उड़ चल उड़ा चल तू।


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