आज बड़े अरसे बाद उनसे मुलाकात हो ही गयी
बैठा जब मैं आधी रात आसमां के नीचे
चाँद ओर तारों से थोड़ी गुफ्तगू फिर से हो गयी
"कहाँ थे तुम ?" दूर चमकते तारे ने पूछा
"यहीं तो था मैं " मैंने कहा
बस तुम्हारी नज़रो से दूर था
"नज़रो से दूर तो पहले भी थे" तारे ने कहा
पर मुझसे रोज़ मिलने भी तो आया करते थे
कुछ तुम अपनी कहते थे, कुछ मैं अपनी कहता था
बाकि रात मुस्कुराहट और शांति के साथ सोते हुए निकाल दिया करते थे
"हाँ वो तो वर्षो पुरानी बात हो गई" मैंने तारे से कहा
अब समय कहाँ अपनी बात करने का,
ये ज़िंदगी तो बहुत भागम-भाग वाली हो गई
मुस्कुराते तो बस दिखावे के लिए हैं
ओर अब सोने में भी वो मज़ा नहीं
यू तो चल रहे हैं इस सफर में
पर अभी तक मंज़िल का ठिकाना नहीं |
"थोड़ी देर रूककर" तारे ने कहा
मंज़िल की चिंता है?
या मुश्किलों का डर
मंज़िल मिल भी गयी तो उसके बाद क्या ?
फिर उसके बाद भी तय करना है एक नया सफर
थोड़ी देर आराम से बैठो ओर सोचो
या फिर भागते रहोगे, बिना जानें की जाना कहाँ चाहते हो
टूट गए हो अगर
तो थोड़ी देर आराम करलो
अपनों के साथ बैठकर कुछ हसीन पलों को दुबारा याद करलो
टूटता तो मैं भी हूँ
पर खत्म नहीं होता हूँ मैं
किसी ना किसी रूप में
अपना जीवन जीता हूँ मैं
क्यों बांधे हो तुम खुदको किसी ज़ंजीरो में
जब खुला है पूरा आसमां तुम्हारे उड़ने के लिए
"बात तो सही कहते हो तुम" मैंने हलकी मुस्कुराहट के साथ कहा
पर नियम तो यही है , नहीं समझोगे तुम
"चलो चलता हूँ मैं अब बहुत देर हो गयी" मैंने भारी दिल से कहा
फिर मिलेंगे कहकर मैंने अलविदा तो कह दिया
पर मालूम हैं मुझे ये मुलाकात दुबारा एक अरसे बाद ही होएगी |
👏👏
ReplyDeleteThanks!!!
DeleteBeautiful poem ����
ReplyDeleteRadha Rani
Thanks!!!
DeleteVery very nice
ReplyDeleteThanks!!!
DeleteLovely! :)
ReplyDeleteThanks!!!
DeleteVery nicely written👏
ReplyDeleteDeep👏
ReplyDeleteThanks :)
DeleteAwsome����
ReplyDeleteThanks:)
DeleteIt beautiful 😊👍
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