Thursday, August 15, 2019

"मेरी आज़ादी" (My freedom)" - A patriotic poem on the occasion of independence day. Through this poem will remember our heroes who fought bravely for freedom.


है दिन आज जश्न-ए-आजादी का
आओ मिलकर इस दिन की खुशियाँ मनाते हैं
कुछ पल रुककर हम अपने वीरों को याद करते है |

आसान नहीं थी वो राह आजादी की
सैकड़ो हिंदुस्तान के दीवानों ने अपनी जान की आहुति दी थी
लम्बी चली थी वो आज़ादी की लड़ाई
जिसके लिए हर किसी ने अपनी आखरी सास तक लड़ाई लड़ी थी |

आज भी खतरा है कुछ दुश्मनों से
जिनसे रक्षा के लिए हमारे जवान सीमा पर खड़े हैं
सब कुछ भुलाकर वो
बस देश सेवा के लिए सीना तान सीमा पर डटे है |

घर परिवार और सभी अपनों को पीछे छोड़
वो देश की सुरक्षा के लिए सबसे आगे खड़े हैं
ना जानें कितने ही दिन भूखे प्यासे रहकर मिलों दूर चले है |

सर्दी गर्मी या फिर हो वर्षा
पूरे फ़र्ज़ और कर्म के साथ सरहद पर डटे हैं
बिना सोये वो हर एक भारतीय को चैन की नींद दिए हैं |

अपनी माँ को भूलकर भारत माँ की सेवा में लगे हैं
हर पल वो यादों के सहारे रहकर
अपनी जान देकर भी देश को सहारा दे रहे हैं |

जिसने सब कुछ छोड़ा मेरी सुरक्षा के लिए
उसको मैं शत-शत नमन करता हूँ
हो जाते हैं वो शहीद मेरी आज़ादी के लिए
उनको मैं अपने प्रभु से भी ऊपर रखता हूँ |

कुछ नहीं है अपेक्षा उनकी हमसे
बस प्यार और सम्मान चाहते है वो
बस याद रहे तुमे वो और ये आज़ादी
जो उन्होंने अपने प्राण देकर कमाई है |

है दिन ये मेरी आज़ादी का
जो बहुत मुश्किलों से पायी है
संजोकर रखना है हमे ये आज़ादी
जो हमने अपने वीरों को खोकर पायी है |

है दिन आज जश्न-ए-आज़ादी का
आओ मिलकर इस दिन की खुशियाँ मनाते हैं
कुछ पल रुककर हम अपने वीरों को याद करते है |



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